सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

संजय का सुबसे खुश दिन


मुझे याद है मेरा ज़िंदगी में सुबसे खुश दिन |  मेरा दसवां जन्मदिन था और मेरा परिवार ने मेरे लिए एक पार्टी का इंतजाम किया |  पार्टी में हम सारे को बहुत मज़ा आया |  मेरे दोस्त और चचेरे भाई ने फुटबॉल खेला और फिर सिनेमाघर जाकर एक फिल्म देखी |  अब तक बारा साल के बाद मुझे याद है किसी फिल्म हमने देखी - "क्राउचिंग टाइगर, हिडन ड्रैगन" |  हम लगभग सारे लड़के थे तो हमको फिल्म का कुंग फु की लड़ाई में बहुत मज़ा आया |  मुझे एक दोस्त था जो फिल्म का अंधेर की बजह से हमारे साथ सिनेमाघर नहीं आ सका |  आजकल वह अमरीकी सेना में कम करता है |  फिल्म देखने के बाद मेरे माथा-पिता ने हमको एक रेस्टोरेंट लिया जहां हमने पिज़्ज़ा खाया |  मेरी माथा-जी मुझे कही कि पिज़्ज़ा पर मैं आदेश दे सका किसी को मुझे चाहिए तो मैंने अनन्नास के साथ खाया |  घर लौटकर एक मदारी हमको मनोरंजन किया |  उसका जादू का इस्तेमाल करके उसने कार्ड और टोपी के ट्रिक्स कीं |   अब तक देर से था लेकिन जाने से पहले हमने केक खाया और उपहार खोले |  केक चॉकलेट से बनाया था क्योंकि मेरी माथा-जी जानती थी कि चॉकलेट मेरी पसंदीदा था |  मैंने वाडिया उपहार मिले - खिलौने, सी.दी., गेंद |  लेकिन सुबसे अचा उपहार एक कुत्ता था |  कई साल के लिए मैंने इस कुत्ता का देखभाल कि |  एसा मनोरंजक पार्टी भी सुबसे अचा अंश दोस्त और संबंधी के साथ होना |

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